Pairi Times की खबर का असर, कलेक्ट्रेट की महीनों की गंदगी 1 घंटे में साफ, भगवान की नजर पड़ी तो चमक उठे 32 विभागों के टॉयलेट ।

Sangani

By Sangani

Pairi Times की खबर का असर गरियाबंद संयुक्त जिला कार्यालय में प्रशासन आखिर हरकत में आया,महीनों से गंदे शौचालय कुछ घंटों में साफ किए गए, कर्मचारियों ने जताई खुशी पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद कहते हैं कलम में ताकत होती है, लेकिन गरियाबंद संयुक्त जिला कार्यालय में शायद Pairi Times 24×7 की खबर ने सफाई कर्मचारी से भी तेज झाड़ू चला दी। जिन शौचालयों में महीनों से गुटखे के पाउच, रैपर और गंदगी का कथित साम्राज्य पसरा था, खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और महज कुछ घंटों में शौचालयों की तस्वीर बदल गई।
जी हां! वही संयुक्त जिला कार्यालय, जहां करीब 30 से 32 विभाग संचालित होते हैं। वही शौचालय, जहां महिला अधिकारी-कर्मचारियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर अपनी परेशानी बताई थी। और वही प्रशासन, जिसे महीनों की गंदगी शायद दिखाई नहीं दी, मगर Pairi Times 24×7 में खबर छपते ही प्रशासनिक नजर इतनी तेज हुई कि आनन-फानन में सफाई कर्मचारी बुला लिए गए।

Pairi Times की खबर का असर

Pairi Times की खबर का असर महीनों की गंदगी 1 घंटे में साफ

Pairi Times 24×7 ने संयुक्त जिला कार्यालय के शौचालयों की बदहाली को प्रमुखता से उठाया था। खबर में जिला कार्यालय के मुखिया और कलेक्टर भगवान सिंह उइके से सीधा सवाल पूछा गया था आखिर संयुक्त कार्यालय के शौचालयों में पसरी गंदगी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
शौचालयों की तस्वीरें खुद व्यवस्था की कहानी बता रही थीं। कहीं गुटखे के पाउच का ढेर था, कहीं रैपर बिखरे थे तो कहीं गंदगी के कारण कुछ सेकंड खड़ा होना भी मुश्किल बताया जा रहा था। महिला अधिकारी और कर्मचारियों ने महिला शौचालयों में कुंडी नहीं होने जैसी गंभीर समस्या भी बताई थी।
लेकिन साहब, कमाल देखिए!
जो गंदगी महीनों तक सरकारी आंखों के लिए शायद अदृश्य थी, वह खबर प्रकाशित होते ही अचानक साफ-साफ दिखाई देने लगी।

Pairi Times ने सवाल पूछा, प्रशासन ने झाड़ू उठा ली

खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। आनन-फानन में सफाई कर्मचारी बुलाए गए और संयुक्त जिला कार्यालय के शौचालयों में सफाई अभियान शुरू हो गया।
गुटखे के पाउच हटे। रैपर उठाए गए। फर्श साफ हुआ। शौचालयों की गंदगी हटाई गई और कुछ ही घंटों में बदहाल टॉयलेट साफ-सुथरे नजर आने लगे।
यानी महीनों की समस्या का इलाज किसी लंबी बैठक, समीक्षा, जांच समिति या भारी-भरकम सरकारी आदेश में नहीं छिपा था।
इलाज सिर्फ एक खबर और एक झाड़ू था!
अब सवाल यह भी है कि यदि कुछ घंटों में शौचालय साफ हो सकते थे तो महीनों तक उन्हें गंदगी में क्यों छोड़ा गया? क्या प्रशासन को तस्वीरें देखने के लिए अखबार और वेब पोर्टल का इंतजार था?

60 से 62 हजार की कथित सफाई राशि का सवाल अभी भी बाकी

Pairi Times 24×7 ने अपनी पिछली खबर में सूत्रों के हवाले से यह सवाल भी उठाया था कि संयुक्त कार्यालय में विभिन्न विभागों से सफाई के नाम पर कथित तौर पर राशि ली जाती है। सूत्रों के अनुसार सभी विभागों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब ₹60 हजार से ₹62 हजार प्रतिमाह तक पहुंचने की चर्चा है।
Pairi Times 24×7 इस कथित राशि की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता, लेकिन प्रशासन से सवाल अब भी कायम है—यदि सफाई के लिए हर महीने इतनी राशि खर्च या एकत्र होने की बात कही जा रही है तो नियमित सफाई क्यों नहीं होती?
खबर छपने के बाद एक दिन में शौचालय चमक सकते हैं तो क्या यही सफाई रोज नहीं हो सकती?

कर्मचारियों ने जताई खुशी, बोले साहब, खबर रोज थोड़ी छपेगी… सफाई रोज होनी चाहिए

संयुक्त कार्यालय के कई कर्मचारियों ने शौचालयों की सफाई होने पर खुशी जताई। कर्मचारियों का कहना था कि सफाई होने से राहत मिली है, लेकिन ऐसी व्यवस्था नियमित रहनी चाहिए।
और बात भी सही है।
आखिर Pairi Times 24×7 रोज शौचालय की तस्वीर लेकर प्रशासन को याद दिलाने तो नहीं आएगा कि साहब, आज भी झाड़ू लगवा दीजिए!
सफाई कर्मचारी की जिम्मेदारी नियमित सफाई करना है और जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी उसकी निगरानी करना। खबर के बाद एक दिन की चमक अच्छी है, मगर असली परीक्षा यह होगी कि यह चमक कितने दिन टिकती है।

भगवान की नजर पड़ी और चमत्कार हो गया,अब कुंडी का इंतजार

कलेक्टर भगवान सिंह उइके से सवाल पूछते हुए प्रकाशित खबर के बाद जिस तेजी से सफाई हुई, उसे देखकर संयुक्त कार्यालय में व्यंग्य में यही कहा जा सकता है भगवान की नजर पड़ी और महीनों की गंदगी कुछ घंटों में गायब हो गई!
लेकिन महिला शौचालयों में सुरक्षित कुंडी और नियमित सफाई जैसे मुद्दों पर स्थायी व्यवस्था अब भी जरूरी है।

Pairi Times 24×7 की खबर का असर हुआ, प्रशासन जागा

और शौचालय साफ हुए यह राहत की बात है। मगर प्रशासन को यह समझना होगा कि स्वच्छता खबर छपने के बाद चलाया जाने वाला आपातकालीन अभियान नहीं, बल्कि रोज निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है महीनों की गंदगी पर प्रशासन मौन रहा, Pairi Times ने तस्वीर दिखाई… और कुछ घंटों में झाड़ू ने वह काम कर दिया, जो महीनों की निगरानी नहीं कर पाई ।

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