गरियाबंद संलग्नीकरण समाप्त शिक्षा विभाग में संलग्न शिक्षकों को मूल पदस्थापना में भेजने का आदेश जारी। कांग्रेस ने कार्रवाई नहीं होने पर चक्काजाम की चेतावनी दी, जिसके बाद DEO राजेश चंद्राकर ने पूरे मामले को लेकर क्या कहा पढ़े पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद गरियाबंद में संलग्नीकरण पर सियासी संग्राम, दफ्तरों की आरामदायक कुर्सी छोड़ मूल स्कूल लौटेंगे शिक्षक या फिर पावर कनेक्शन बचाएगा पोस्टिंग ? शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण शब्द भले ही सरकारी फाइलों की भाषा हो, लेकिन गरियाबंद में वर्षों से इसकी चर्चा किसी पावर पोस्टिंग से कम नहीं रही। मूल पदस्थापना स्कूल में, मगर हाजिरी जिला मुख्यालय के दफ्तर में,बच्चे गांव के स्कूल में शिक्षक का इंतजार करते रहे और कुछ शिक्षक कार्यालयों में फाइलों के बीच शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटे रहे। लेकिन अब सरकार के आदेश और कांग्रेस के अल्टीमेटम ने इस पुराने सिस्टम की कुर्सी हिला दी है।

गरियाबंद संलग्नीकरण समाप्त, समीक्षा बैठक में स्कूल मंत्री ने दिए थे निर्देश ।
23 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री ने संलग्न कर्मचारियों और शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में वापस भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने 25 जून 2026 को पत्र जारी कर जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विकासखंड स्रोत समन्वयक कार्यालयों में संलग्न कर्मचारियों एवं शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए। आदेश में संलग्न कर्मचारियों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।

कांग्रेस ने पूछा आदेश सरकारी है या सिर्फ फाइल सजाने के लिए?
अब संलग्नीकरण के मुद्दे पर कांग्रेस भी मैदान में उतर गई है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने सोमवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिला शिक्षा कार्यालय, समग्र शिक्षा कार्यालय और जिले के सभी विकासखंड शिक्षा कार्यालयों में वर्षों से संलग्न कर्मचारियों एवं शिक्षकों को तत्काल मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने की मांग की है।
कांग्रेस का आरोप है कि शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद गरियाबंद जिले में अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। कई शिक्षक और कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी मूल पदस्थापना स्कूलों और अन्य संस्थानों में है, लेकिन वे वर्षों से कार्यालयों में संलग्न होकर काम कर रहे हैं।
स्कूल में शिक्षक कम, दफ्तर में मास्टर साहब का क्या काम?
यही वह सवाल है जिस पर कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा है। गांवों के कई स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कहीं एक शिक्षक के भरोसे कई कक्षाएं हैं तो कहीं बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षक कार्यालयों में संलग्न होकर वर्षों से ‘दफ्तरी जिम्मेदारी’ निभा रहे हैं।
अब सवाल सीधा है जिस शिक्षक की नियुक्ति बच्चों को पढ़ाने के लिए हुई, उसकी जरूरत ब्लैकबोर्ड के सामने ज्यादा है या कार्यालय की फाइलों के पीछे?
DEO राजेश चंद्राकर बोले नोटिस जारी, अब मूल जगह पर देनी होगी जॉइनिंग
जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने स्पष्ट किया है कि मंत्री के आदेश के बाद संलग्नीकरण समाप्त कर कर्मचारियों और शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग देने के आदेश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि संलग्नीकरण के तहत जितने भी शिक्षक कार्यालयों में अटैच हैं, उन्हें नोटिस जारी कर विधिवत अपने मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदेश में संबंधित कार्यालयों को कर्मचारियों और शिक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त करने तथा मूल संस्था में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। अगले माह का वेतन भी मूल संस्था के उपस्थिति प्रतिवेदन के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करने की बात आदेश में कही गई है।
आदेश नहीं माना तो वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी फाइल
राजेश चंद्राकर ने कहा कि जो शिक्षक या कर्मचारी आदेश का पालन नहीं करेंगे, उनके संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। नियमानुसार पत्राचार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यानी अब तक कार्यालय की फाइल संभाल रहे मास्टर साहब के आदेश नहीं मानने पर संभव है कि उनकी अपनी फाइल ही वरिष्ठ अधिकारियों की टेबल तक पहुंच जाए।
कांग्रेस का अल्टीमेटम वापसी नहीं हुई तो गरियाबंद में चक्काजाम
जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शासन के आदेश के अनुसार संलग्न कर्मचारियों और शिक्षकों को शीघ्र कार्यमुक्त नहीं किया गया तो कांग्रेस जिला मुख्यालय में चक्काजाम आंदोलन करेगी।
उन्होंने कहा कि आंदोलन की स्थिति में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। कांग्रेस के इस अल्टीमेटम के बाद संलग्नीकरण का मामला अब केवल शिक्षा विभाग की फाइल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
अब देखना दिलचस्प सरकारी आदेश जीतेगा या पावर कनेक्शन ?
राज्य सरकार के आदेश के बाद संलग्नीकरण खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गरियाबंद में भी जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी कर दिया है। लेकिन असली परीक्षा अब आदेश की नहीं, उसके पालन की है।
कितने शिक्षक दफ्तर की कुर्सी छोड़ अपने मूल स्कूल पहुंचेंगे? कितनों की जॉइनिंग ब्लैकबोर्ड के सामने होगी? और कितने अपने कथित पावर कनेक्शन के सहारे जिला मुख्यालय में बने रहने का नया रास्ता तलाशेंगे?
फिलहाल शिक्षा विभाग में आदेश जारी है, कांग्रेस सड़क पर उतरने की चेतावनी दे चुकी है और स्कूलों में बच्चे शायद यही उम्मीद लगाए बैठे हैं मास्टर साहब, अब तो वापस आ जाओ!
यह भी देखे …बंदूक के जगह ला लिस कैमरा ,माओवाद के गढ़ म का देखे बर आवत हवाए देशभर ले सैलानी मन ?