गरियाबंद में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यक्रम से पहले ही पंडाल खाली होने लगा, घंटों इंतजार के बाद लौटने लगी जनता, जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं और प्लानिंग पर उठे सवाल।
गरियाबंद मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के प्रस्तावित गरियाबंद दौरे में कार्यक्रम शुरु होने के पूर्व ही अजीब स्थिति बन गई जब कार्यक्रम शुरू होने के निर्धारित समय के कई घंटे बाद तक मुख्यमंत्री मंच पर नहीं पहुंचे और इंतजार करते-करते पंडाल में बैठी जनता वापस लौटने लगी। देखते ही देखते सैकड़ों लोगों से भरा पंडाल खाली होने लगा और अधिकारियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगीं।

मुख्यमंत्री के जारी प्रोटोकॉल के अनुसार दोपहर 2:40 बजे गरियाबंद पहुंचने और 3 बजे से विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रमों में शामिल होने का समय निर्धारित था। कार्यक्रम में करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन प्रस्तावित था। लेकिन समय बीतता गया और मंच पर मुख्यमंत्री का इंतजार लंबा होता गया।
इंतजार लंबा, जनता का धैर्य छोटा
कई घंटों तक कुर्सियों पर बैठे रहने के बाद लोगों ने एक-एक कर कार्यक्रम स्थल छोड़ना शुरू कर दिया। हालात ऐसे बने कि मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचने से पहले ही पंडाल का बड़ा हिस्सा खाली नजर आने लगा। कार्यक्रम स्थल का दृश्य देखकर ऐसा लग रहा था मानो जनता ने विकास से पहले घर वापसी को प्राथमिकता दे दी हो। पब्लिक को जाते देख मंच पर उपस्थित अधिकारी आनन फानन में उन्हें रोकने के लिए गेट की ओर दौड़ते दिखे
आमजनों ने तो किया विरोध पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी जताई नाराजगी
पुलिस परेड ग्राउंड में होने वाले 7 सौ करोड़ के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के शुरू होने के पूर्व ही पंडाल खाली हो गया और जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी मंच पर खड़े होकर यह नजारा देखते रह गए मंच पर मौजूद आमजनों में जहां नाराजगी देखने को मिली वही पार्टी के कार्यकर्ता भी नाराज नजर आए ।
व्यवस्था पर उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन की तैयारियों और कार्यक्रम प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। पंडाल पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि वीआईपी कार्यक्रमों में समय प्रबंधन और समन्वय बेहतर नहीं होगा तो जनता का उत्साह भी धीरे-धीरे कम होता जाएगा।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई थी। कई पत्रकारों ने कार्यक्रम कवरेज में आई दिक्कतों को सार्वजनिक रूप से उठाया था। और कई बड़े समाचार पत्रों में मुख्यमंत्री के आगमन की खबर ही नहीं लगाई थी ।।ऐसे में ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक प्लानिंग और समन्वय को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
खाली पंडाल बना चर्चा का विषय
राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि 7 सौ करोड़ के विकास कार्यों का इंतजार तो जनता कर सकती है, लेकिन तीन घंटे से ज्यादा का इंतजार शायद अब जनता भी नहीं करना चाहती। वहीं कुछ लोग इसे प्रशासनिक प्रबंधन की परीक्षा में फेल होने जैसा बता रहे हैं।
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