गरियाबंद में पंचायत सचिव बर्खास्त जिला पंचायत के आदेश में वित्तीय अनियमितताओं, रिकॉर्ड की कमियों और 8 लाख 83,175 की वसूली योग्य राशि के बाद कार्यवाही की गई । पढ़े पूरी ख़बर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद बैठक हुईं, प्रस्ताव भी बने, खर्च भी हुए… लेकिन जब हिसाब-किताब और रिकॉर्ड की बारी आई तो जिला पंचायत ने दिखा दिया बाहर का रास्ता, ग्राम पंचायत उरमाल के सचिव सत्यरंजन हंसराज पर कार्रवाई, और साथ में 8 लाख 83 हजार 175 की राशि वसूली योग्य भी बताई गई। पंचायतों में विकास के नाम पर फाइलें चलती हैं, प्रस्ताव पारित होते हैं और सरकारी राशि खर्च भी होती है। लेकिन जब इन सबका हिसाब मांगा जाए और रिकॉर्ड ही सवालों के घेरे में आ जाए, तो फिर कुर्सी बचाना आसान नहीं होता। गरियाबंद जिला पंचायत के एक आदेश ने कुछ ऐसा ही संदेश दिया है। यहां ग्राम पंचायत सचिव सत्यरंजन हंसराज को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यानी पंचायत की जिम्मेदारी संभालने वाली कुर्सी अब हाथ से निकल गई।
जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा जारी आदेश में सचिव के खिलाफ कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। मामला केवल कार्यालय में नियमित उपस्थिति का नहीं, बल्कि पंचायत के कामकाज, निर्माण कार्यों, वित्तीय लेन-देन और बैठक की कार्यवाही से जुड़े रिकॉर्ड का भी है।

गरियाबंद में पंचायत सचिव बर्खास्त प्रस्ताव के बिना खर्च, रिकॉर्ड के बिना हिसाब…
आदेश के मुताबिक, सचिव पर ग्राम पंचायत मुख्यालय में निवास नहीं करने, नियमित रूप से पंचायत में उपस्थित नहीं रहने और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने जैसे आरोपों का उल्लेख है। इसके अलावा पंचायत के वित्तीय कार्यों में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आने की बात कही गई है।
15वें वित्त आयोग की राशि से संबंधित कार्यों में तकनीकी स्वीकृति और पंचायत प्रस्ताव के बिना व्यय किए जाने का उल्लेख है। कुछ निर्माण कार्यों में नियमों के विपरीत खर्च और आवश्यक अभिलेखों के संधारण में कमी भी आदेश का हिस्सा है।
व्यंग्य की बात यही है कि सरकारी व्यवस्था में काम कराने के लिए प्रस्ताव, स्वीकृति और रिकॉर्ड जरूरी हैं। लेकिन यदि इन्हीं कागजों का हिसाब अधूरा रह जाए, तो विकास की कहानी पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
8 लाख 83 हजार 175 की राशि पर भी उठे सवाल
जिला पंचायत के आदेश में विभिन्न मदों में किए गए व्यय का उल्लेख करते हुए कुल 8 लाख 83 हजार 175 की राशि वसूली योग्य बताई गई है। आदेश में पंचायत की बैठकों की कार्यवाही पंजी, प्रस्तावों के उल्लेख और पदाधिकारियों के हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान जैसी प्रक्रियाओं में भी गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं।
बैठक हुई या नहीं, प्रस्ताव पारित हुआ या नहीं और कार्यवाही किस आधार पर दर्ज की गई इन सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट होना चाहिए। आखिर पंचायत का हिसाब कोई ऐसी पहेली तो नहीं, जिसे अधिकारी भी ढूंढते रह जाएं ।
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर द्वारा जारी आदेश में छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए सचिव को पंचायत सचिव के पद से बर्खास्त किया गया है। आदेश तत्काल प्रभावशील बताया गया है। इस आदेश को अन्य ऐसे सचिवों के लिए भी एक मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है जो अपने कार्य में लापरवाही और कोताही बरतते है ।
कुल मिलाकर, गरियाबंद की इस कार्रवाई ने पंचायतों में जवाबदेही और रिकॉर्ड संधारण की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। विकास कार्यों में केवल राशि खर्च होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका नियमों के अनुरूप होना और पूरा हिसाब उपलब्ध रहना भी जरूरी है। क्योंकि पंचायत की कुर्सी पर बैठकर फाइलों को नजरअंदाज करना आसान हो सकता है, लेकिन जब उन्हीं फाइलों की बारी आती है, तो कुर्सी भी जवाब मांगने लगती है।