गरियाबंद छात्रावास हादसा गरियाबंद के मदनपुर आदिवासी छात्रावास में दो छात्र गर्म दाल से झुलसे,हादसे के बाद परिजनों को सूचना देने में कथित लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद मदनपुर के आदिवासी छात्रावास में दो छात्रों के झुलसने की घटना सामने आने के बाद मामला अब सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं रह गया है। घटना 19 सितंबर की बताई जा रही है, लेकिन इसके बाद बच्चों के परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया और छात्रावास प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्र झुलसे तो उनके माता-पिता को इसकी जानकारी कब दी गई और घटना की विभागीय स्तर पर क्या रिपोर्ट तैयार की गई?
मिली जानकारी के अनुसार कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्र ओंकार ध्रुव और मुरली गर्म दाल से झुलस गए थे। दोनों के हाथ, पैर और चेहरे पर चोट आने की बात सामने आई है। उनका जिला अस्पताल में उपचार कराया गया। इसके बाद दोनों को छात्रावास में बेड रेस्ट दिए जाने की जानकारी है। इसी दौरान उनके त्रैमासिक परीक्षा से वंचित रहने की बात भी सामने आई है।

गरियाबंद छात्रावास हादसा बच्चे छात्रावास में, लेकिन घटना की जानकारी परिवार तक कैसे पहुंची ?
पीड़ित छात्र के पिता दिनेश ध्रुव के अनुसार उन्हें छात्रावास प्रबंधन की ओर से बच्चे के झुलसने की तत्काल जानकारी नहीं मिली। उनका कहना है कि बच्चे ने खुद फोन कर परिवार को बुलाया। इसके बाद वे छात्रावास पहुंचे और बच्चे की स्थिति देखने के बाद उसे घर ले गए। फिलहाल परिवार अपने स्तर पर उसका इलाज करा रहा है।
यहीं से मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल निकलता है—क्या छात्रावास में किसी बच्चे के घायल होने पर उसके अभिभावक को सूचना देने की कोई निर्धारित प्रक्रिया है और इस मामले में उसका पालन हुआ था?
सरकारी व्यवस्था में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
छत्तीसगढ़ आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के उपलब्ध दस्तावेजों में छात्रावास अधीक्षक को बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि अधीक्षक का विद्यार्थियों के माता-पिता से सतत संपर्क होना चाहिए। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी बच्चों की सुरक्षा और देखभाल में सहयोगी भूमिका निभाने की बात कही गई है।
ऐसे में मदनपुर की घटना में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हादसे के समय छात्रावास में कौन-कौन कर्मचारी ड्यूटी पर थे, रसोई की निगरानी किसके जिम्मे थी और घटना के बाद किस अधिकारी को कब सूचना दी गई।
अब जांच सिर्फ हादसे की नहीं, पूरी प्रक्रिया की हो
परिवार की शिकायत और सामने आए तथ्यों के आधार पर विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि घटना की कोई लिखित रिपोर्ट बनी या नहीं, बच्चों के उपचार का रिकॉर्ड क्या कहता है और अभिभावकों को सूचना देने की प्रक्रिया क्या रही।
क्योंकि छात्रावास में रहने वाला बच्चा सिर्फ छात्र नहीं होता। उसके माता-पिता अपने बच्चे को विभागीय निगरानी और सुरक्षा के भरोसे पर वहां छोड़ते हैं। इसलिए 19 सितंबर की घटना में बच्चे कैसे झुलसे? के साथ-साथ यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि हादसे के बाद जिम्मेदार व्यवस्था ने क्या किया?
इस पूरे मामले को लेकर आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी से फोन लगाकर संपर्क करने का प्रयास किया गया मगर उनसे संपर्क नहीं हो पाया pari Times 24×7 इस मामले में विभाग का पक्ष और घटना से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद पूरी तस्वीर पाठकों के सामने रखेगा।
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