गरियाबंद में गांजा जब्त 2 बसें 2 तस्करी के तरीके चावल की बोरी में गांजा, ऊपर पैरा की परत दो बसों से 91 किलो 5 सौ ग्राम गांजा जब्त, कीमत 45.79 लाख रुपए, सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया । तस्करों ने बसों को बनाया जरिया, पुलिस ने 67.8 और 23.7 किलो गांजा पकड़ा।
गरियाबंद ओडिशा सीमा से छत्तीसगढ़ होते हुए राजधानी रायपुर तक गांजा पहुंचाने के लिए तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी कार में गुप्त चेंबर तो कभी दूसरे सामान के बीच गांजा छिपाकर ले जाने की कोशिश की जाती है। लेकिन इस बार तस्करों ने जो तरीका अपनाया, वह भी गरियाबंद पुलिस की नजरों से बच नहीं सका।
रविवार को गरियाबंद पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में करीब 91 किलो 5 सौ ग्राम गांजा जब्त किया है। साथ में 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है खास बात यह है कि दोनों मामलों में तस्करों ने निजी कार या किसी लग्जरी वाहन का सहारा लेने के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानी बसों को गांजा पहुंचाने का जरिया बनाया था। पुलिस ने दोनों मामलों में जब्त गांजे की कुल कीमत करीब 45 लाख 79 हजार रुपये बताई है।

गरियाबंद में गांजा जब्त 2 बसें 2 तस्करी के तरीके चावल की बोरी में छिपाया 67 किलो गांजा
पहले मामले में पुलिस को महेश बस की डिक्की में रखी 4 चावल की बोरियों पर संदेह हुआ। जांच के दौरान जब बोरियों को खोलकर देखा गया तो उनके भीतर गांजा छिपाने का पूरा इंतजाम मिला।
तस्करों ने गांजे को सीधे बोरी में रखने के बजाय पहले उसे कार्टून के अंदर पैक किया। इसके बाद कार्टून में चावल उसके ऊपर बोरी में रखा गया और ऊपर पैरा डालकर इस तरह पैक किया गया कि पहली नजर में बोरी सामान्य चावल की बोरी ही दिखाई दे।
पुलिस ने ऐसी 5 पैकेट बरामद किए। जांच में इनसे करीब 67 किलो 8 सौ ग्राम गांजा मिला, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 33 लाख 90 हजार रुपये बताई गई है। इसमें 2 आरोपी शम्सुद्दीन निवासी यूपी अशोक यदु निवासी सीजी को गिरफ्तार किया ।
तस्करों की प्लानिंग देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका मकसद पुलिस की जांच के दौरान गांजे को सामान्य कृषि सामग्री या खाद्यान्न की खेप जैसा दिखाना था।
दूसरी बस में बैग से निकला 23 किलो 700 ग्राम गांजा
दूसरे मामले में पुलिस ने मां शारदा बस में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी कृष्णा चंद निवासी ओडीसा के पास रखे बैग की जांच की। बैग खोलने पर उसमें करीब 23 किलो 700 ग्राम गांजा बरामद हुआ।
पुलिस के मुताबिक जब्त गांजे की कीमत करीब 11 लाख 85 हजार रुपये है। इस तरह दोनों कार्रवाई में पुलिस ने कुल लगभग 91 किलो 5 सौ ग्राम गांजा बरामद किया, जिसकी कीमत करीब 45 लाख 79 हजार रुपये आंकी गई है।
ओडिशा बॉर्डर से रायपुर तक बस बनी तस्करों का रास्ता?
इन दोनों मामलों ने गांजा तस्करी के एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर इशारा किया है। ओडिशा सीमा से रायपुर की ओर गांजा पहुंचाने के लिए तस्कर अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। बस में सफर करने पर अलग वाहन की पहचान या संदिग्ध कार की तरह तत्काल शक नहीं होने का फायदा उठाने की कोशिश की जाती है।
लेकिन गरियाबंद पुलिस की सतर्कता ने तस्करों की यह रणनीति भी फेल कर दी।
तस्करी का तरीका बदला, पुलिस की निगाह नहीं
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तस्कर हर बार गांजा छिपाने के नए तरीके तलाश रहे हैं, तो क्या बसों के जरिए होने वाले इस नेटवर्क के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है?
चावल की बोरी में 67 किलो 8 सौ ग्राम गांजा और दूसरे मामले में यात्री के बैग से 23 किलो 700 ग्राम गांजा मिलना केवल दो अलग-अलग घटनाएं हैं या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है यह जांच का अहम बिंदु होगा।
गरियाबंद पुलिस की इन कार्रवाईयों से फिलहाल इतना साफ है कि तस्करों ने रास्ता और तरीका जरूर बदल दिया है, लेकिन पुलिस की नजर से बच निकलना अभी भी आसान नहीं है।