मशरूम खेती प्रशिक्षण गरियाबंद..अब घर के कोने में उगेगा सफेद सोना, गरियाबंद की दीदियों ने शुरू की मशरूम वाली कवक-क्रांति ।

Sangani

By Sangani

मशरूम खेती प्रशिक्षण गरियाबंद के देवभोग में आरसेटी द्वारा महिलाओं को मशरूम खेती का 450 शब्दों का विशेष प्रशिक्षण लेख, जानें कैसे ग्रामीण महिलाएं सफेद सोना उगाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं पढ़ें पूरी खबर पैरी टाईम्स पर ।

गरियाबंद ​आजकल जहां दुनिया वर्क फ्रॉम होम के नए-नए डिजिटल तरीके खोज रही है, वहीं गरियाबंद के देवभोग की महिलाओं ने अपना खुद का एक जबरदस्त नेचुरल बिज़नेस मॉड्यूल ढूंढ लिया है। जिले के देवभोग विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम कदलीमुड़ा स्थित रीपा (RIPA) परिसर में इन दिनों एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही है। यहाँ बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) ने जब मशरूम खेती के मुफ्त प्रशिक्षण का बोर्ड लगाया, तो ग्रामीण महिलाएं भी पूरे उत्साह के साथ अपनी किस्मत की नई फसल उगाने निकल पड़ीं। अब आलम यह है कि जो दीदियाँ कल तक रसोई के मसालों और खेती-किसानी के पारंपरिक कामों में माहिर थीं, वे अब मशरूम स्पॉन (बीज) की तैयारी और हाइजीन कंट्रोल के वैज्ञानिक फॉर्मूले रट रही हैं।

मशरूम खेती प्रशिक्षण गरियाबंद

मशरूम खेती प्रशिक्षण गरियाबंद, बिना जमीन की जमींदारी का नया हुनर

​अकसर हमारे समाज में यह धारणा रही है कि अगर आपको बड़ी खेती करनी है, तो आपके पास कई बीघे जमीन, हल-ट्रैक्टर और पसीने छुड़ाने वाली कड़ी मेहनत होनी चाहिए। लेकिन मशरूम की इस कवक-क्रांति ने सदियों पुराने इस भारी-भरकम मिथक को बड़े ही प्यार से किनारे लगा दिया है। आरसेटी के प्रशिक्षकों ने महिलाओं को यह बखूबी समझा दिया है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए आपको किसी बड़ी जागीर की जरूरत नहीं है बल्कि घर के एक छोटे, अंधेरे और ठंडे कोने में भी सफेद सोना यानी मशरूम उगाकर आप अपनी आर्थिक स्थिति को रोशन कर सकती हैं।

​प्रशिक्षण के दौरान जब महिलाओं को शासन की ओर से मुफ्त टी-शर्ट और कैप पहनाई गई, तो नज़ारा किसी हाई-टेक स्टार्टअप की बोर्ड मीटिंग जैसा लगने लगा। ग्रामीण परिवेश की ये महिलाएं जब स्पॉनिंग,पाश्चुरीकरण और विपणन (मार्केटिंग) जैसे तकनीकी शब्दों की बारीकियां सीख रही थीं, तो उनकी आँखों में एक अलग ही आत्मविश्वास झलक रहा था। उन्होंने मुस्कुराते हुए यह संकेत भी दे दिया कि अब वे सिर्फ मशरूम की सब्जी बनाना नहीं जानतीं, बल्कि इसे शहर के बड़े होटलों और बाजारों में बेचकर अपनी तिजोरी भरना भी सीख चुकी हैं। कम लागत और कम मेहनत में मुनाफे का यह गणित अब देवभोग की गलियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रशिक्षण की बारीकियां और उज्ज्वल भविष्य

​इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने महिलाओं को बीज (स्पॉन) की तैयारी से लेकर खाद बनाने, कच्चे माल का चयन करने, और फसल की देखभाल करने की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई। महिलाओं को बताया गया कि मशरूम एक ऐसी फसल है जिसे घर की महिलाएं घरेलू काम निपटाने के साथ-साथ आसानी से संभाल सकती हैं। प्रशिक्षण में न केवल उत्पादन सिखाया गया, बल्कि तैयार मशरूम के उचित भंडारण और उसकी सही कीमत पाने के लिए मार्केटिंग के गुर भी बताए गए।

​साथ ही, महिलाओं को शासन की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराया गया, ताकि वे भविष्य में आर्थिक सहायता या बैंक ऋण (Loan) लेकर अपने इस छोटे से प्रयास को एक बड़े उद्योग में बदल सकें। आरसेटी की इस पहल ने न केवल महिलाओं को हुनरमंद बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय भी लिख दिया है।

यह भी पढ़ें …. महिला आरक्षण बिल नहीं परिसीमन बिल पास कराना चाह रही थी भाजपा, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने बोला हमला ।

कृपया शेयर करें

लगातार सही खबर सबसे पहले जानने के लिए हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़े

Join Now

Join Telegram

Join Now

error: Content is protected !!