अवैध ट्रैक्टर ट्रॉली निर्माण गरियाबंद का नया आविष्कार बिना लाइसेंस मौत बनाने की फैक्ट्रियां…और RTO का जादुई एक्शन, वारसी ट्रेडर्स का बोर्ड हटा और गायब हो गया सारा अवैध निर्माण ?

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By Sangani

अवैध ट्रैक्टर ट्रॉली निर्माण गरियाबंद में अवैध ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण पर परिवहन विभाग की लचर कार्रवाई और वारसी ट्रेडर्स जैसे केंद्रों द्वारा नियमों के उल्लंघन पर एक पैरी टाईम्स की रिपोर्ट ।

गरियाबंद अगर आपको लगता है कि इंजीनियरिंग के लिए भारी-भरकम डिग्री और सुरक्षा मानकों की जरूरत होती है तो आपको एक बार गरियाबंद जिले का दौरा जरूर करना चाहिए। यहाँ के गली-कूचों में केंद्रीय मोटर यान नियमों (CMVR) की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं कि कानून भी शर्म से पानी-पानी हो जाए,प्रशासन की नाक के नीचे ट्रैक्टर-ट्रॉली और टैंकर निर्माण की अवैध इकाइयां कुकुरमुत्ते की तरह उग आई हैं जहाँ न तो कोई लाइसेंस है और न ही सुरक्षा की चिंता। यहाँ बस जुगाड़ चलता है और वह जुगाड़ सड़कों पर यमराज बनकर दौड़ रहा है।

अवैध ट्रैक्टर ट्रॉली निर्माण

​अवैध ट्रैक्टर ट्रॉली निर्माण वारसी ट्रेडर्स का करिश्मा बोर्ड गायब तो समझो अवैध धंधा भी गायब

​इस पूरे खेल में सबसे दिलचस्प किरदार कोदोबतर स्थित वारसी ट्रेडर्स का है। यहाँ बिना किसी सरकारी परमिशन के ट्रॉलियों का उत्पादन और सेल-परचेज का काम ऐसे चलता है जैसे कोई परचून की दुकान हो। जब इस अवैध धंधे की शिकायत गरियाबंद के आरटीओ तक पहुंची तो उम्मीद थी कि सख्त कार्रवाई होगी और मशीनें जब्त की जाएंगी। लेकिन साहब आरटीओ के अधिकारियों ने तो जादुई कार्रवाई कर दी। उन्होंने न तो माल जब्त किया और न ही दुकान सील की बल्कि केवल बाहर टंगा बोर्ड उतरवा दिया। शायद विभाग को लगता है कि अगर बोर्ड नहीं दिखेगा तो अवैध निर्माण अपने आप अदृश्य हो जाएगा। विभाग की इसी मेहरबानी का नतीजा है कि वारसी ट्रेडर्स ने कई ट्रॉलियां बनाकर बेच भी दीं और जो गरियाबंद की सड़कों पर बे लगाम दौड़ते दिखाई दे रही है। और विभाग अब भी गहरी नींद में है।

सुरक्षा मानक गए तेल लेने अब तो बस लोहा और वेल्डिंग का खेल

​गरियाबंद जिले के इन अवैध केंद्रों पर बनने वाली ट्रॉलियों का हाल यह है कि इनमें न तो ढंग का ब्रेकिंग सिस्टम है और न ही रिफ्लेक्टर। रात के अंधेरे में ये बिना लाइट वाली ट्रॉलियां किसी चलते-फिरते काल से कम नहीं हैं। घटिया लोहे और कच्ची वेल्डिंग के सहारे खड़ी की गई ये ट्रॉलियां कब बीच सड़क पर दम तोड़ दें कोई नहीं जानता। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर होने वाले 40% हादसों का कारण यही दोषपूर्ण ट्रॉलियां हैं लेकिन प्रशासन शायद किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगा।

टैक्स की चोरी और अधिकारियों की खानापूर्ति

​ये अवैध इकाइयां न केवल लोगों की जान से खेल रही हैं बल्कि सरकार को मिलने वाले जीएसटी और टैक्स को भी करोड़ों का चूना लगा रही हैं। बिना किसी चेसिस नंबर और वजन प्रमाणन के ट्रॉलियों का यह काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। शहर के बीचों-बीच और हाईवे के किनारे हो रहे इस अवैध निर्माण पर परिवहन विभाग की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है। इस मामले को लेकर बाकायदा आरटीओ विभाग को शिकायत भी गई जिसके बाद विभाग ने वारसी ट्रेडर्स को 17 मार्च 2026 को डाक के माध्यम एक नोटिस जारी करते हुए बिना व्यापार प्रमाण पत्र के ट्राली की बिक्री की जा रही इसका जवाब 7 दिन में देने का गया था इसका जवाब विभाग को मिला या नहीं पर कार्यवाही के नाम खानापूर्ति का दिखावा जरूर कर दिया गया ।

​अब सवाल यह है कि क्या गरियाबंद कलेक्टर और परिवहन विभाग के ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी केवल बोर्ड हटवाने तक ही सीमित रहेंगे या इन मौत के सौदागरों पर कोई कड़ी कार्रवाई करने की हिम्मत भी दिखाएंगे, फिलहाल तो गरियाबंद की सड़कों पर नियम नहीं बल्कि अवैध निर्माताओं का रसूख दौड़ रहा है।

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