गरियाबंद वारसी ट्रेडर्स की कछुआ चाल पर विभाग का हथौड़ा… नोटिस-नोटिस का खेल खत्म, इस विभाग ने किया अनुबंध निरस्त और लाखों का जुर्माना ।

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By Sangani

गरियाबंद वारसी ट्रेडर्स के ठेकेदार इरफान वारसी की लेटलतीफी पर दो विभागों का अलग एक्शन,RES ने दिसंबर 2025 में अनुबंध निरस्त कर 2 लाख का जुर्माना ठोका, जबकि ट्राइबल विभाग केवल नोटिस की खानापूर्ति कर रहा है। क्या बच्चों के भविष्य से कीमती है ऐसे ठेकेदार का हित पढ़े पूरी खबर पैरी टाईम्स पर ?

गरियाबंद जिले के प्रशासनिक गलियारों में आजकल एक ही चर्चा है सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का,मामला ठेकेदार इरफान वारसी (वारसी ट्रेडर्स) की लेटलतीफी का है, जिस पर जिले के दो विभागों ने दो अलग-अलग कहानियां लिख दी हैं। एक तरफ कड़ा शासन है, तो दूसरी तरफ नोटिस-नोटिस वाला खेल ।

गरियाबंद वारसी ट्रेडर्स

गरियाबंद वारसी ट्रेडर्स RES विभाग का हथौड़ा 12 दिसंबर को ही कर दिया था गेम ओवर

​कहते हैं जब अधिकारी की मंशा साफ हो, तो सिस्टम फर्राटा भरता है। छुरा ब्लॉक के खड़मा शासकीय स्कूल के जीर्णोद्धार का काम सितंबर 2023 में इस उम्मीद से दिया गया था कि जनवरी 2024 तक बच्चे नए स्कूल में पढ़ेंगे। विभाग के कार्यपालन अभियंता ने ठेकेदार को एक-दो नहीं, बल्कि 8 बार नोटिस (सरकारी लव लेटर) भेजे, लेकिन वारसी ट्रेडर्स का एटीट्यूड तो देखिए साहब ने जवाब देना तो दूर, पत्र को पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा। शायद ठेकेदार को लगा कि सरकारी सिस्टम है, यहाँ तो तारीख पे तारीख ही मिलती है।

मगर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के कार्यपालन अभियंता ने 12 दिसंबर 2025 को ही यह साबित कर दिया। स्कूल जीर्णोद्धार में ठेकेदार इरफान वारसी की कछुआ चाल से तंग आकर विभाग ने न केवल उसका अनुबंध तत्काल प्रभाव से निरस्त किया, बल्कि 2 लाख 4 हजार रुपए का भारी-भरकम जुर्माना भी ठोक दिया। यहाँ न कोई सिफारिश चली, न कोई बहाना सीधा एक्शन और ठेकेदार साहब का बोरिया-बिस्तर गोल

ट्राइबल विभाग की ममता,अप्रैल 2026 तक सिर्फ कागजी झुनझुना

​अब जरा आदिवासी विकास विभाग की सुस्त दुनिया में कदम रखिए यहाँ भी इरफान वारसी का ही राज है, जिन्होंने छात्रावासों में शौचालय निर्माण को लंबे समय के लिए लटका दिया है। लेकिन यहाँ के जिम्मेदार अधिकारी शायद नोटिस लिखने की प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। जहाँ RES ने दिसंबर में ही अनुबंध रद्द कर दिया था, वहीं ट्राइबल विभाग अप्रैल 2026 आ जाने के बाद भी केवल नोटिस की खानापूर्ति कर रहा है। छात्रावास के बच्चे सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, पर विभाग ठेकेदार को सुधरने के अनगिनत मौके दिए जा रहा है।

सोशल मीडिया पर सवाल यह इश्क क्या कहलाता है?

​जनता अब सोशल मीडिया पर पूछ रही है कि जब एक ही ठेकेदार की वैसी ही लापरवाही पर RES विभाग सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है, तो ट्राइबल विभाग में ऐसी कौन सी मजबूरी है कि यहाँ केवल नोटिस का खेल चल रहा है? क्या आदिवासी छात्रों की तकलीफों से ज्यादा ठेकेदार की साख प्यारी है?

​RES विभाग की 12 दिसंबर की कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए आईना है जो कागजी खानापूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। अब देखना होगा कि इस खबर के बाद आदिवासी विकास विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटती है या फिर नोटिस का यह धारावाहिक अभी और चलेगा। फिलहाल तो जिले में एक ही नारा गूँज रहा है एक्शन हो तो RES जैसा, वरना नोटिस तो रद्दी के भाव बिकते ही हैं!

रिकॉर्डिंग का ‘हथियार’ और ब्लैकमेलिंग का डर, क्या इसी वजह से वारसी पर मेहरबानी?

​प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक चर्चा जोरों पर है कि आखिर क्या वजह है कि एक ही ठेकेदार की बार-बार लापरवाही के बावजूद कुछ विभाग उन पर कार्रवाई के बजाय इनायत बरसा रहे हैं? सूत्रों की मानें तो इस मेहरबानी के पीछे का सच किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। खबर है कि ठेकेदार इरफान वारसी द्वारा कथित रूप से अधिकारी कर्मचारियों सहित कई तरह के लोगों की कॉल रिकॉर्डिंग कर उसको एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जिसके चलते अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई की फाइल छूने से भी कतराते हैं।

​नाम न छापने की शर्त पर विभाग के कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके अनुसार, ठेकेदार द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली जाती है। कथित तौर पर इन्हीं रिकॉर्डिंग्स का सहारा लेकर बाद में उन पर दबाव बनाया जाता है। चर्चा तो यहाँ तक है कि काम न मिलने या सख्त कार्रवाई होने की स्थिति में इन रिकॉर्डिंग्स को आधार बनाकर झूठी ब्लैकमेलिंग और शिकायतों की धमकी दी जाती है। यही कारण है कि नोटिस का खेल तो चलता है, लेकिन नकेल नहीं कसी जाती।

RES विभाग ने तोड़ा डर का चक्रव्यूह

​जहाँ एक तरफ ट्राइबल विभाग में रिकॉर्डिंग का डर कार्रवाई को रोक रहा है, वहीं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के अधिकारी इस मामले में दो कदम आगे निकले। RES विभाग ने इन कथित धमकियों और दबाव की राजनीति को दरकिनार करते हुए शुद्ध कानूनी प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को आधार बनाया और पुख्ता दस्तावेजों के साथ वारसी ट्रेडर्स का बोरिया-बिस्तर गोल कर दिया।

कानूनी प्रक्रिया के आगे फेल हुए दांव-पेंच

​विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई अधिकारी पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया (जैसे अनुबंध की कंडिका 3 के तहत कार्यवाही) का पालन करता है, तो किसी भी तरह की रिकॉर्डिंग या ब्लैकमेलिंग बेअसर हो जाती है। RES विभाग की 12 दिसंबर की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि यदि नियत साफ हो, तो किसी भी हथियार से डरने की जरूरत नहीं है। अब देखना यह है कि क्या ट्राइबल विभाग भी इस डर के साये से बाहर निकलकर छात्रों के हित में कोई साहसिक फैसला लेता है या नहीं।

कानूनी टिप्पणी उपरोक्त लेख विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी और लोक चर्चा पर आधारित है। कॉल रिकॉर्डिंग और ब्लैकमेलिंग के दावे कथित हैं, जिनकी पुष्टि न्यूज़ पोर्टल नहीं करता है।

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