गरियाबंद निर्माण कार्य लापरवाही… ठेकेदार की सुस्ती ने बढ़ाई विभाग की सिरदर्दी, 6 महीने का काम डेढ़ साल बाद भी अधूरा, अब विभाग के रडार पर ठेकेदार ।

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By Sangani

गरियाबंद निर्माण कार्य लापरवाही आदिवासी छात्रावासों में निर्माण कार्य में देरी को लेकर सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल सख्त, वारसी ट्रेडर्स की लापरवाही के कारण छात्र परेशान, विभाग ने थमाया अंतिम चेतावनी नोटिस, पढ़ें पूरी रिपोर्ट पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद विकास कार्यों में लेटलतीफी कैसे विभाग की छवि और छात्रों की उम्मीदों पर भारी पड़ती है, इसका ताजा उदाहरण गरियाबंद में देखने को मिल रहा है। आदिवासी सहायक आयुक्त कार्यालय द्वारा जिले के छात्रावासों को बेहतर बनाने की मुहिम में ठेकेदारी प्रथा रोड़ा बन गई है। जिस निर्माण कार्य को महज 6 महीने में खत्म कर छात्रों को समर्पित करना था, उसे वारसी ट्रेडर्स (गौरव पथ) डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं कर पा रहा है।

गरियाबंद निर्माण कार्य लापरवाही

​गरियाबंद निर्माण कार्य लापरवाही विभाग की मंशा और ठेकेदार की मनमानी

​शासन की योजना के अनुसार, सुदूर वनांचल के आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए छात्रावासों में शौचालय और अतिरिक्त कमरों का निर्माण कराया जाना है। 7 अक्टूबर 2024 को पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास गरियाबंद, बेन्दकुरा और पंटोरा कन्या आश्रम के लिए इरफान वारसी को कार्य आदेश जारी किए गए थे। सहायक आयुक्त कार्यालय ने समय पर राशि (पंटोरा आश्रम हेतु 3 लाख) भी जारी कर दी ताकि काम न रुके, लेकिन ठेकेदार की कार्यशैली ने विभाग की मेहनत पर पानी फेर रखा है । मार्च 2025 की समयसीमा कब की खत्म हो गई, लेकिन अप्रैल 2026 तक काम का पूरा न होना ठेकेदार की घोर लापरवाही को दर्शा रहा है।

निर्माण कार्य की लापरवाही को लेकर सहायक आयुक्त का कड़ा रुख

​इस पूरे मामले में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल अब एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि विभाग छात्रों की सुविधाओं से समझौता नहीं करेगा। ठेकेदार की इस कछुआ चाल को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने नोटिस जारी कर अंतिम मोहलत दी है।

​सहायक आयुक्त पटेल के अनुसार, विभाग ने अपनी ओर से प्रक्रियात्मक कार्यों में कोई देरी नहीं की है, लेकिन निर्माण एजेंसी की निष्क्रियता के कारण छात्रों को परेशानी हो रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दी गई नई समय अवधि में काम की गुणवत्ता और गति में सुधार नहीं हुआ, तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ केवल नोटिस नहीं, बल्कि नियमानुसार ब्लैकलिस्ट करने जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जावेगी।

प्रशासनिक सख्ती की उम्मीद

​शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन जब ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते, तो अधिकारियों को भी कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। अब देखना होगा कि सहायक आयुक्त की इस सख्ती के बाद क्या वारसी ट्रेडर्स की नींद टूटती है या फिर पंटोरा, बेन्दकुरा और गरियाबंद के छात्रावासों के छात्र अभी और इंतजार करेंगे।

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