एक्सपायरी एक्सटिंग्विशर के भरोसे पढ़ रहे बच्चे.. फायर सेफ्टी या फायर से खिलवाड़ ? गरियाबंद के स्कूलों में भगवान भरोसे नौनिहालों की जान , जांच में खुली चौंकाने वाली हकीकत ।

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By Sangani

एक्सपायरी एक्सटिंग्विशर के भरोसे प्राइवेट स्कूल गरियाबंद के निजी स्कूलों में फायर सेफ्टी नियमों की भारी अनदेखी सामने आई। जांच में एक्सपायरी फायर सिलेंडर, अधूरी सुरक्षा व्यवस्था और बिना एनओसी संचालित स्कूलों का खुलासा हुआ।

गरियाबंद अगर आप अपने बच्चों को गरियाबंद के प्राइवेट स्कूल में और हजारों रुपए महीने की भारी भरकम फीस देकर निश्चिंत है कि आपके बच्चे सुरक्षित है तो इन नामचीन प्राइवेट स्कूलों की फायर सेफ्टी के प्रति सामने आई लापरवाही आपकी पूरी सोच को बदलकर रख देगी गरियाबंद के अधिकांश स्कूलों में फायर सेफ्टी की NOC ही नहीं है उसके बावजूद इसका संचालन धड्डले से हो रहा है । लखनऊ के दर्दनाक अग्निकांड में मासूम बच्चों की मौत के बाद पूरे देश में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन गरियाबंद में हालात ऐसे मिले कि मानो जिम्मेदार किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हों। पैरी टाईम्स की पड़ताल और एसडीआरएफ की जांच में जिले के कई निजी स्कूलों में फायर सेफ्टी नियम केवल कागजों तक सीमित नजर आए। कहीं फायर सिलेंडर एक्सपायर मिले तो कहीं सुरक्षा उपकरण ही नदारद थे। कई स्कूल ऐसे भी मिले जहां बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा भरोसा किस्मत पर दिखाई दिया।

एक्सपायरी एक्सटिंग्विशर

एक्सपायरी एक्सटिंग्विशर लखनऊ हादसे के बाद खुली गरियाबंद के स्कूलों की पोल

22 जून को लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जिसमें 15 मासूम लापरवाही की बलि चढ़ गए ।इस घटना के बाद गरियाबंद के निजी स्कूलों की पड़ताल की गई। जांच में सामने आया कि अधिकांश स्कूल फायर सेफ्टी के बुनियादी मानकों को पूरा किए बिना संचालित हो रहे हैं।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि कई स्कूलों में लगे फायर सिलेंडर महीनों और वर्षों पहले एक्सपायर हो चुके थे। यानी यदि किसी आपात स्थिति में आग लग जाए तो बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल भगवान और भाग्य पर ही निर्भर रह जाएगी

CBSE वाले द्रोणाचार्य स्कूल में नियमों को दिखाया गया ठेंगा

चिखली स्थित द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल में फायर सिलेंडर एक वर्ष पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। जानकारी के अनुसार अग्निशमन विभाग ने पिछले वर्ष इन्हें बदलने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। स्कूल बसों में लगे सभी फायर सिलेंडर भी एक्सपायर मिले। वहीं फायर होजरी पाइप की व्यवस्था भी अधूरी पाई गई।

दो सिलेंडर के भरोसे चल रहा पूरा नर्सिंग कॉलेज

मालगांव स्थित शिवम नर्सिंग कॉलेज में निर्माणाधीन भवन में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। पूरे परिसर के लिए केवल दो छोटे फायर सिलेंडर मिले,बसों में लगे सुरक्षा उपकरण भी एक्सपायरी हो चुके थे और अन्य सुविधाएं भी संतोषजनक नहीं थी। सवाल यह है कि यदि कोई बड़ा हादसा हो जाए तो क्या दो छोटे सिलेंडर सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे?

राइजिंग स्टार में स्टार सुरक्षा नहीं, एक्सपायरी सिलेंडरों का जखीरा

पारागांव स्थित राइजिंग स्टार इंग्लिश स्कूल में एक एक्सटिंग्विशर एक हफ्ते पहले ही एक्सपायरी हो चुका था जबकि अधिकांश फायर सिलेंडर एक से दो साल पहले ही एक्सपायर हो चुके थे। हैरानी की बात यह रही कि सभी सिलेंडरों को एक ही कमरे में रखा गया था। नियमों के अनुसार इन्हें भवन के अलग-अलग हिस्सों में लगाया जाना चाहिए। स्कूल की छत पर मात्र 2 हजार लीटर की पानी टंकी मिली, जबकि मानक 5 हजार लीटर का है। यंहा भी होजरील नहीं लगाया गया है और कई तरह की खामियां हैनुएक बाद भी बिना फायर सेफ्टी NOC के स्कूल संचालित है

श्रद्धा स्कूल के पास एनओसी, बाकी स्कूलों के पास भरोसा

पड़ताल के दौरान सामने आया कि जिले में केवल श्रद्धा पब्लिक स्कूल के पास फायर सेफ्टी एनओसी उपलब्ध है। हालांकि निरीक्षण के दौरान वहां भी एक्सटिंग्विशर (फायर सिलेंडर) एक्सपायर मिले। स्कूल प्रबंधन ने दावा किया कि सिलेंडर रिफिलिंग के लिए भेजे गए हैं।

नियम कहते हैं सुरक्षा जरूरी, व्यवस्था कहती है सब चलता है

फायर सेफ्टी नियमों के अनुसार स्कूलों में वैध फायर सिलेंडर, अग्निशमन पाइप लाइन, छत पर 5 हजार लीटर और जमीन पर 10 हजार लीटर क्षमता की पानी टंकी तथा फायर सेफ्टी एनओसी अनिवार्य है। लेकिन जांच में अधिकांश संस्थान इन मानकों से दूर नजर आए। सिवाय श्रद्धा पब्लिक स्कूल के किसी भी स्कूल में होजरील नहीं है । बावजूद स्कूलों का संचालन धड्डले से हो रहा है इस लापरवाही को देखते फायर सेफ्टी विभाग ने द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल, राइजिंग स्टार स्कूल,शिवम नर्सिंग कॉलेज और बॉयज स्कूल रोज पर संचालित एक लाइब्रेरी को नोटिस जारी किए है

कलेक्टर बोले आपके बताने पर संज्ञान में आया है कार्रवाई होगी, अब निगाहें प्रशासन पर

मामले में कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा कि यदि फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन पाया गया है तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसडीआरएफ और अग्निशमन विभाग ने अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम 2018 की धारा 33 के तहत कई संस्थानों को नोटिस जारी किया है।


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई किसी हादसे से पहले होगी या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?

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