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गरियाबंद नाबालिग दुष्कर्म मामला गरियाबंद के मैनपुर में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी बिसनाथ नेताम को मिली सख्त सजा और अर्थदंड सुनाया पढ़े पूरी खबर पैरी टाईम्स पर।
गरियाबंद जंगल में फुट्टू (जंगली सब्जी) खोजने के बहाने नाबालिग बालिका को अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय, गरियाबंद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने आरोपी को सख्त सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी बिसनाथ नेताम उर्फ बांडा (40 वर्ष), निवासी गोर्दाबाहरा, जाड़ापदर, थाना मैनपुर, जिला गरियाबंद को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।

गरियाबंद नाबालिग दुष्कर्म मामला घर से गायब हुई, तलाश के बाद सामने आया जंगल का सच
मामला 14 अगस्त 2025 का है। विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी के अनुसार, पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपनी नाबालिग पुत्री को घर पर छोड़कर पत्नी के साथ लकड़ी लेने जंगल गया था। शाम को वापस लौटने पर बेटी घर पर नहीं मिली। आसपास के रिश्तेदारों के यहां तलाश करने के बाद भी उसका पता नहीं चला।
अगले दिन गुमशुदगी की शिकायत पर पुलिस ने तलाश शुरू की। पुलिस की कार्रवाई के दौरान 16 अगस्त 2025 को आरोपी के घर से नाबालिग बालिका बरामद हुई। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी बिसनाथ नेताम उर्फ बांडा उसे फुट्टू (जंगली सब्जी) खोजने के बहाने जंगल ले गया था। इसके बाद उसे अपने घर ले जाकर जबरदस्ती दुष्कर्म किया।
12 वर्षीय पीड़िता के मामले में 11 गवाहों के बयान
मामले में पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), पॉक्सो एक्ट की धारा 6 एवं 4(2) तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया। प्रकरण की विवेचना निरीक्षक शिवशंकर हरी और उपनिरीक्षक गुनैश्वरी नरेटी द्वारा की गई।
विशेष लोक अभियोजन की ओर से अपराध को प्रमाणित करने के लिए कुल 11 गवाहों के बयान कराए गए। फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद आरोपी को दोषी पाया।
कोर्ट ने सुनाई 20 साल की सजा, अर्थदंड भी लगाया
न्यायालय के फैसले के अनुसार, पॉक्सो एक्ट की धारा 6 एवं 4(2) के तहत आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। वहीं, भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड का प्रावधानित दंड सुनाया गया है।
यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करता है।