स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन की पहल, जाने USTR के 17 गांवों में से कितने गांवों ने दी सहमति, 45 दिन में होगा सत्यापन और नई जमीन का चिन्हांकन ।

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By Sangani

Pairi Times 24×7 गरियाबंद

स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन की पहल गरियाबंद में स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन को लेकर बैठक हुई, देखे 17 गांवों में से कितने गांवों की सहमति, 45 दिन में सत्यापन और नई जमीन चिन्हांकन की पूरी प्रक्रिया जानिए पैरी टाईम्स पर।

गरियाबंद जिले में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के फॉरेस्ट एरिया में रहने वाले ग्रामीणों के स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन को लेकर जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर परिसर में हुई इस बैठक में गरियाबंद कलेक्टर रणबीर सिंह उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के उपनिदेशक वरुण।जैन सहित वन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों के साथ विस्थापन के लिए इच्छुक ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। बैठक में 17 गांवों से जुड़े विस्थापन के मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसमें जुगाड़ और देवघर अमली गांव के ग्रामीणों ने स्वेच्छा से विस्थापन के लिए सहमति जताई है। अब प्रशासन ने इच्छुक परिवारों की पहचान, दावे-आपत्तियों के निराकरण और नई भूमि के चिन्हांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन की पहल विस्थापन में 8 प्रमुख एजेंडे और सुझावों पर हुई चर्चा

स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन बैठक में राजस्व भूमि की उपलब्धता, वैकल्पिक वन भूमि, फॉरेस्ट क्लियरेंस और पुनर्वास स्थल के चयन पर चर्चा हुई। नए स्थल पर सड़क, बिजली, स्कूल, पेयजल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। ग्रामीणों की आजीविका, चारागाह और निस्तार व्यवस्था के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहे। संबंधित विभागों के समन्वय से समय-सीमा में कार्य पूरा करने और विस्थापित परिवारों के हितों को ध्यान में रखकर पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सुझाव दिए गए।

17 गांवों में से 2 गांवों के ग्रामीणों ने जताई विस्थापन की सहमति

बैठक में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बताया गया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आने वाले 17 गांवों के ग्रामीणों के स्वैच्छिक विस्थापन को लेकर प्रक्रिया पर विचार किया गया। वर्तमान बैठक में जुगाड़ और देवघर अमली गांव के ग्रामीणों की ओर से विस्थापन के लिए सहमति सामने आई है।

प्रशासन के अनुसार, जो ग्रामीण स्वेच्छा से विस्थापित होना चाहते हैं, उन्हें पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इच्छुक लाभार्थियों का चिन्हांकन कर 45 दिनों के भीतर सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों को दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा, ताकि पात्रता और संबंधित दावों का परीक्षण किया जा सके।

45 दिन में नई जमीन का चिन्हांकन, भारत सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव

स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन की प्रक्रिया के तहत नई भूमि का चिन्हांकन भी 45 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद फॉरेस्ट लैंड डायवर्जन से संबंधित प्रस्ताव को समय पर भारत सरकार के समक्ष भेजने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधा, स्कूल, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकताओं को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने पर भी बैठक में चर्चा हुई। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि विस्थापन पूरी तरह स्वैच्छिक योजना के आधार पर होगा। जो ग्रामीण अपने गांव में रहना चाहते हैं, उन पर किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जाएगी।

देवझर-अमली और जुगाड़ के 60 प्रतिशत परिवार विस्थापन के इच्छुक

बैठक में शामिल होने पहुंचे देवघर अमली गांव के ग्रामीण पुष्तम मांझी ने बताया कि कलेक्टर की ओर से बैठक में स्वैच्छिक विस्थापन और पुनर्वास को लेकर जानकारी दी गई। उनके अनुसार, गांव में कुल 156 परिवार हैं, जिनमें लगभग 120 परिवार विस्थापन के लिए तैयार हैं, जबकि करीब 30 से 35 परिवार गांव छोड़ना नहीं चाहते।

मांझी ने बताया कि प्रशासन ने आवेदन देने के लिए 45 दिन का समय दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, विस्थापन की प्रक्रिया में परिवारों की सहमति और पुनर्वास की व्यवस्था महत्वपूर्ण विषय हैं।

बारनवापारा का उदाहरण देकर ग्रामीणों को समझाई गई पुनर्वास की प्रक्रिया

बैठक के दौरान बारनवापारा क्षेत्र में पहले हुए ग्राम विस्थापन का उदाहरण भी सामने रखा गया। जानकारी के अनुसार, लगभग 10 वर्ष पहले तीन गांवों के परिवार विस्थापन प्रक्रिया में शामिल हुए थे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विस्थापित और गांव में रह गए परिवारों के रहन-सहन तथा आर्थिक स्थिति में समय के साथ अंतर देखने को मिला है।

अधिकारियों के अनुसार, बारनवापारा क्षेत्र में पहले विस्थापित हुए परिवारों को पुनर्वास स्थल का दौरा भी कराया गया था, ताकि गरियाबंद क्षेत्र के ग्रामीण वहां की व्यवस्थाओं और संभावित सुविधाओं को समझ सकें। उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि यदि 17 गांवों के ग्रामीण स्वेच्छा से विस्थापन स्वीकार करते हैं, तो उनके परिवारों के भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

विस्थापन पर सरकार की ओर से क्या मिलेगा? जानिए प्रति यूनिट का प्रावधान

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, विस्थापन करने वाले ग्रामीणों को सरकार की ओर से प्रति यूनिट 15 लाख रुपये या 5 एकड़ जमीन में से किसी एक विकल्प का लाभ मिलने का प्रावधान बताया गया है।

एक यूनिट के अंतर्गत पति-पत्नी को शामिल किया जाता है। वहीं, 18 वर्ष से अधिक आयु के बेटे-बेटियों को अलग-अलग यूनिट के रूप में गिना जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, पति-पत्नी और चार वयस्क बच्चों वाले परिवार में कुल पांच यूनिट बन सकती हैं। इस स्थिति में जमीन का विकल्प चुनने पर 25 एकड़ तक भूमि और राशि का विकल्प चुनने पर 75 लाख रुपये का लाभ बनता है, बशर्ते संबंधित पात्रता और सरकारी नियमों के अनुसार सभी यूनिट स्वीकृत हों।

ग्रामीण दोनों विकल्पों का चुनाव कर सकते है ।

ग्रामीणों के लिए यह भी बताया गया कि परिवार के सदस्य उपलब्ध विकल्पों के अनुसार जमीन या राशि या दोनों का चुनाव प्रति यूनिट अलग अलग कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ और पात्रता का निर्धारण संबंधित सरकारी नियमों तथा सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर होगा।

स्वैच्छिक विस्थापन की यह प्रक्रिया अब 45 दिन के सत्यापन, दावे-आपत्तियों और भूमि चिन्हांकन के चरण में आगे बढ़ेगी। ग्रामीणों की सहमति, पुनर्वास की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता इस पूरी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पहलू रहेंगे।

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